सुरमयी अंखियों में बसा संजय वन

मंच रंग बिरंगे और सुगंधित, फूलों से कुतंल को साजे, इंद्रनील की माला डाले, शंख सरीखे सुधड़ गालों में ... बाबा नागार्जुन की यह पंक्ति संजय वन के सौंदर्य को बखुबी परिभाषित करती है। संजय वन दिल्ली के महत्वपूर्ण वनों में एक है जहां की सुरमयी सुबह कई मामलों में... [पूरी पोस्ट]
writer हेमेन्द्र मिश्र
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[24 Jan 2009 01:25 AM]

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