तुझसे बिछड़ के हम भी मुकद्दर के हो गये - स्वर्गीय फराज़ साहब
तुझसे बिछड़ के हम भी मुकद्दर के हो गयेफिर जो भी दर मिला है उसी दर के हो गयेफिर यूं हुआ के गैर को दिल से लगा लियाअंदर वो नफरतें थीं कि बाहर के हो गयेक्या लोग थे के जान से बढ़ कर अजीज थेअब दिल से मेह नाम भी अक्सर के हो गयेऐ याद-ए-यार तुझ से करें क्या श...
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नयनसुख
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[26 Aug 2008 19:17 PM]



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