आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... हर एक सांस हर पल कम हो रही है, ज़िन्दगी मैकदे में जाम बन रही है. न कोई गम हो, न गिला, न शिकवा कोई दोस्त हों आघोष में मेरे, न हो दुश्मन कोई शिकन न हो चेहरे पे मेरे, न हो खौफ कोई न शिकायत हो किसी से, न उधारी कोई तमन्नाएँ अधूरी न रह जाएँ कोई सिसकियाँ न... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Aug 2009 00:12 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix