आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....
हर एक सांस हर पल कम हो रही है, ज़िन्दगी मैकदे में जाम बन रही है. न कोई गम हो, न गिला, न शिकवा कोई दोस्त हों आघोष में मेरे, न हो दुश्मन कोई शिकन न हो चेहरे पे मेरे, न हो खौफ कोई न शिकायत हो किसी से, न उधारी कोई तमन्नाएँ अधूरी न रह जाएँ कोई सिसकियाँ न...
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●๋• नीर ஐ
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[22 Aug 2009 00:12 AM]



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