दर्द महोदय

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... हमारे घर में कुछ दिनों पहले एक मेहमान आया था, नाम पुछा तो खुद को "दर्द" बतलाया था। रोज़ भोजन पानी मेरी खुशियों का करता था, जब देखो उदासी की जीभ लप-लपाया करता था। अतिथि देवो भावः में विश्वास करता हूँ, इसलिए अपनी खुशियाँ भी उसके नाम करता था। मेरी मसरूफ... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ
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[29 Dec 2009 02:28 AM]

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