तेरा इन्तजार....
तनहाइयों से घबराया दिल इसलिए तेरा इन्तजार सरे शाम करते हैं छुपती नहीं मोहब्बत इसलिए जिक्र इसका सरे आम करते हैं कोरी थीं दिल की दरो - दीवारें इसलिए अब उनपे तेरा नाम लिखते हैं कटी पतंग थी जिन्दगी इसलिए जिन्दगी का दामन अब तेरे नाम करते हैं तन्हा कटती नह...
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अर्चना तिवारी
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[23 Jun 2009 03:34 AM]



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