वो पूनम की रात...
ख़त्म होगा आज इन्तजार फिर से आई वो पूनम की रात आया है पैगाम उनका आएँगे वो आज रात करेंगे दीदार उनका मेरे ये चंचल नयन होगा फिर धरा का गगन से चाँद का सितारों से घटा का पर्वतों से लहरों का साहिल से मिलन गूँज उठेंगी गलियां आज उनके कदमों की आहट से फिर चली...
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अर्चना तिवारी
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[23 Jun 2009 02:56 AM]



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