चंद अशआर
दिल कि तनहाइयों से घबराकर प्यार किया प्यार ने भी तनहाइयों का सिला दिया संग गुजरती थी मेरे जिनकी हर शाम रहती है अब बेखबर मेरे उनकी हर शाम कहते थे कि बिन तेरे न अब मेरी सहर होगी मगर अब हर शाम भी उनकी मेरे बगैर होगी आँख खुल जाती थी जिनकी मेरी आहट सुनकर...
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अर्चना तिवारी
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[06 Jul 2009 06:51 AM]



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