क्षणिकायें

अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड रात और दिन रात झुक जाती है दिन के कंधे पर दिन उसे लिये फिरता है फिर थक जाता है रात की नींद खुल जाती है दिन को थपकाती है सहलाती और सुलाती है खुद एक आंख में सारी रात काट देती है कौन कहता है कि दिन का विलोम रात है। उदासी और मुस्कान मैंने जब भी पूछा उसकी... [पूरी पोस्ट]
writer अमरेन्द्र:
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[01 Mar 2009 19:04 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix