kuch kavitayen kuch hain geet
एक जंगली बेल की तरह फैलता हुआ मेरा प्यार , तुमने उसको बोनसाई बनाना चाहा हर बार । खुशियों की जड़ें काटीं खिलखिलाहटों के पत्ते तोडे । लगाया एक उथली कमाना के गमले में । सींचा सुविधाओं की कृत्रिम नमी से । अफ़सोस लेकिन, तुम्हारा हर यतन गया बेकार । जंगली बेल...
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सीमा रानी
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[06 Feb 2009 09:10 AM]



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