मौसम

kuch kavitayen kuch hain geet मोरपंखी दिन हुए हैं ,सिंदूरी शाम । सांवरी सुहागन रात, चांदनी चादर ओढे , सिमट -सिमट जाती है । आसमान के सीने में छिपाकर चेहरा , गाती है ,होंठों ही होंठो में , प्रियतम का नाम। मोरपंखी दिन हुए हैं ,सिंदूरी शाम । कोहरे मैं लिपटी सुबह , थमा जाती है ,चाय का... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा रानी
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[13 Feb 2009 11:56 AM]

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