एक भिखारन को सरकारी सम्मान...!?!
आपने श्रीमती रागिनी शुक्ला की लिखी दो कहानियाँ दुलारी और कर्ज शीर्षक से सत्यार्थमित्र पर पढ़ी और सराही हैं। रागिनी दीदी की लिखी एक और मार्मिक कहानी यहाँ प्रस्तुत है। यह कहानी भी एक वास्तविक पात्र के दुखड़े को सच-सच बयान करती है: हत्भाग्य दादी के यहाँ...
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रचना त्रिपाठी
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[16 Jun 2009 00:02 AM]



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