किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार
बात आगे बढ़ावै ते पहिले पहिले तनुक बानगी द्याखौ। ई कुछ प्रसंग आहीं जउन याक अवधी किताब तेरे लीन गे हैं। 1. ठगी क्यार प्रसंग:....रात मा जब हमरे सब रुकेन तौ हमैं इहै सोचि-सोचि कै बहुत देर तक नींद नहीं आई कि ई सब ठग हैं! हम जागै कै पूरी कोसिस किहेन लेकिन...
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पंकज शुक्ल
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[07 Oct 2008 12:21 PM]



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