सेल

monikashekhar चकचौंध भरी रौशनी में दुनिया को दिखाती नही स्वत्रंत राज में इन्सान इन्सान के खून से नहाता है ला शो के ढेर पर खरी है इंसानियत बाजारों में सेल के भाव बिकती है इस देश में वफादारी की कसौटी पर संदेह देखती है अब तो लोकतंत्र की मन्दिर में भी सेल लगने लगी है... [पूरी पोस्ट]
writer monikashekhar
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[13 Sep 2008 05:41 AM]

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