बातों की अनकही..
बातों की अनकही कोई क्या जाने,न भी जाने तो क्या जाने, जाने भी तो क्या जाने, बातों का छलावा तो बहुत करते है, कोई खुद उस छलावा को जाने तो समझे,ख्वाबों के टूटने का गम नहीं, जितनी बातों के बदले का होता है, दर्द तो ख्वाबों के टूटने का भी होता है, पर उस दर्...
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monikashekhar
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[07 Dec 2008 04:57 AM]



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