बचपन
वह पिपल की छांव, खुली आकाश में हमारा बचपन वह बलखाती सी हवाएं, अमृत सा धूप जिस पर कुर्बान थी हमारी बचपन की शरारतें आज तड़पाती है बचपन की नदानी भरी शरारतें गर्मी की छुट्टी में गांव जाना हरियाली की छांव तले रहना फूलों से घिरी लताएं के बीच महलों में रहना...
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monikashekhar
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[20 Dec 2008 05:20 AM]



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