अब तो आओ बरखा रानी...
गर्मी से निकलती आह दिल में बरसात की चाह हर दिन एक आस कि अब घिरें काली घटाएं अपनी ठंडी बूंदों से समस्त भूतल को भिगो जाएं घनघोर घटा कुछ ऐसी छाए बूढ़े, बच्चों और जवानों को भी रिमझिम बारिश राहत दे जाए किसानों की दुआओं में भी है सिर्फ आजकल पानी मानसून में...
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vikas vashisth
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[28 Jun 2009 07:54 AM]



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