वो बूढ़ी औरत...

जाते-जाते... पिछले दिनों एक साक्षात्कार के सिलसिले में लोकसभा जाना हुआ। इसकी आरंभ सीमा के पास ही एक बूढ़ी औरत बैठी रो रही थी। मैनें उनसे पूछा क्या हुआ मां जी, मगर कुछ कहने के बजाय उनकी सिसकियां और बढ़ गई। मैंने फिर उनसे कहा कि देखिए मैं आपके बेटे के समान हूं। कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer vikas vashisth
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[04 Jul 2009 07:02 AM]

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