मां का कमरा

श्याम सुन्दर अग्रवाल छोटे-से पुश्तैनी मकान में रह रही बुज़ुर्ग बसंती को दूर शहर में रहते बेटे का पत्र मिला- ‘मां, मेरी तरक्की हो गई है। कंपनी की ओर से मुझे बहुत बड़ी कोठी मिली है, रहने को। अब तो तुम्हें मेरे पास शहर में आकर रहना ही होगा। यहां तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी।... [पूरी पोस्ट]
writer SHYAM SUNDER AGGARWAL

लघुकथाएँ

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[02 Jun 2009 07:59 AM]

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