संतू

श्याम सुन्दर अग्रवाल प्रोढ़ उम्र का सीधा-सा संतू बेनाप बूट डाले पानी की बालटी उठा जब सीढ़ियां चढ़ने लगा तो मैने उसे सचेत किया, “ध्यान से चढ़ना! सीढ़ियों में कई जगह से ईंटें निकली हुई हैं। गिर न पड़ना।” “चिंता न करो, जी! मैं तो पचास किलो आटे की बोरी उठाकर सीढ़ियां चढ़ते ह... [पूरी पोस्ट]
writer SHYAM SUNDER AGGARWAL

लघुकथाएँ

views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Jun 2009 08:02 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix