एक उज्जवल लड़की

श्याम सुन्दर अग्रवाल रंजना, उसकी प्रेयसी, उसकी मंगेतर दो दिन बाद आई थी। आते ही वह कुर्सी पर सिर झुका कर बैठ गई। इस तरह चुप-चाप बैठना उसके स्वभाव के विपरीत था। “क्या बात है मेरी सरकार! कोई नाराजगी है?” कहते हुए गौतम ने थोड़ा झुक कर उसका चेहरा देखा तो आश्चर्यचकित रह गया। ऐ... [पूरी पोस्ट]
writer SHYAM SUNDER AGGARWAL

लघुकथाएँ

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[02 Jun 2009 08:00 AM]

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