तीस वर्ष बाद
आज फिर सुखविंदर की माँ का फोन आया था।” पत्नी ने बताया तो नरेश व्याकुल हो उठा, “तीसरे दिन ही फोन आ जाता है किसी न किसी का। दिमाग खराब कर रखा है।” सुखविंदर इंजनियरिंग कालेज में उनकी बेटी बबली का सहपाठी रहा था। दोनों एक-दूसरे को चाहते थे। न लड़का कहीं औ...
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SHYAM SUNDER AGGARWAL
लघुकथाएँ
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[02 Jun 2009 08:00 AM]



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