जीवन-गाथा

श्याम सुन्दर अग्रवाल जीवन की पुस्तक वर्षों से मेज पर खुली पड़ी है हवा चलती है तो पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं कुछ पन्नों से किलकारियों की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुछ पन्नों से खिलखिलाहट की आवाज़ें भी आती हैं। बर्फीली हवाओं के शिकार हुए बहुत से पन्ने सीलन की बदबू आती रहती है... [पूरी पोस्ट]
writer SHYAM SUNDER AGGARWAL

कविताएँ

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[03 Jul 2009 04:03 AM]

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