आम आदमी
भला करो’ के दो शब्द ही अपने धर्म में पाता है जहाँ तक हो सके निभाता है आगे भी वही फैलाता है। प्यार के लिए ही समय पर्याप्त नहीं मिलता नफ़रत के लिए वक्त कहाँ निकाल पाता है। किसी के दुख का सबब न बने कोई परेशान न हो ठेस न पहुँचे किसी मन को और भावनाएँ आहत...
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SHYAM SUNDER AGGARWAL
कविताएँ
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[09 Jul 2009 10:12 AM]



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