गांव बहुत याद आता है ...

मेरी डायरी के पन्ने... वो पुरानी हवेली की दीवार पर उगा पीपल... अक्सर मुझे याद कर के मुस्कुराता है... खिल उठती है वो खेतों की पगडंडियां... जब पंछियों के साथ उड़ता मेरा बचपन... अब भी उनको कहीं दिख जाता है... गेंहू की अधपकी बालियों को खाने का स्वाद... कई बार की पिटाई के साथ य... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Jul 2009 16:02 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix