गांव बहुत याद आता है ...
वो पुरानी हवेली की दीवार पर उगा पीपल... अक्सर मुझे याद कर के मुस्कुराता है... खिल उठती है वो खेतों की पगडंडियां... जब पंछियों के साथ उड़ता मेरा बचपन... अब भी उनको कहीं दिख जाता है... गेंहू की अधपकी बालियों को खाने का स्वाद... कई बार की पिटाई के साथ य...
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हेमन्त वशिष्ठ
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[09 Jul 2009 16:02 PM]



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