एक मजदूर (मजबूर) की मौत

मेरी डायरी के पन्ने... कैलाश को अस्पताल में दाखिला तो मिला लेकिन इलाज के लिए नहीं, पोस्टमॉर्टम के लिए" जैसे ही एक साथी रिपोर्टर से पीटीसी की ये चंद लाइनें सुनी... सभी एक दम से उछल पड़े... वाह गुरु ! खबर बेच दी आपने... वर्ना किसको पड़ी है कि एक मज़दूर की मौत की खबर चलाए वो... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[09 Jul 2009 16:06 PM]

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