आज़ादपुर मंडी की बोरियों से एक मुलाक़ात

मेरी डायरी के पन्ने... आज सुबह जब उठा तो लगा कि जैसे पूरे घर को खबर है... आज मेरी छुट्टी है... आदतन दो कप चाय पीने के बाद जब आंखें खुली तो 11 बज चुके थे ...अरे हां ...वाकई मेरी छुट्टी है... माता जी ने जैसे ही देखा कि मैंने उठते ही अखबार ढूंढना शुरु कर दिया है , उन्होंने फौ... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[09 Jul 2009 15:54 PM]

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