बाबा का बुलावा ...

मेरी डायरी के पन्ने... रात अपनी रफ़्तार से बढ़ रही थी... और हमारी रफ़्तार पर सड़क कभी-कभार जैसे ब्रेक से लगा देती थी । रास्ता एकदम अनजान... और रात के इस पहर एकदम सुनसान...वीरान... अंधेरी सड़क पर सावधानी से आगे बढ़ते रोशनी के दो बिंदु... औऱ सन्नाटे में सबको अपने गुजरने का अ... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Jul 2009 15:52 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix