बाबा के दर्शन...औऱ घर वापसी

मेरी डायरी के पन्ने... सुबह जब आंख खुली तो एक अरसे बाद या कुछ यूं कहें कि बहुत अच्छा महसूस हुआ... ये सुबह वाकई सुबह की तरह थी... नीला आसमान... सूरज के आने के आभास से शर्माया सा... देख कर वाकई ऐसा लगा कि ... ये नया रंग कौन सा है... खैर... इसके बाद नज़र पड़ी चारपाई की बगल मे... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[04 Aug 2009 07:15 AM]

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