बालगीत -बन्दर जी
कुछ बन्दर मेरे बाग में आये धमाचौकड़ी खूब मचाये पेड़ से तोड़ के पत्ती खाये पापा जी को गुस्सा आए। नजर पड़ी उनकी गमलों पर लगे नोचने फ़ूलों को सब बन्दरों ने गिराई गमले की माटी पापा ने दे मारी लाठी । दुम दबा कर बन्दर भागे पापा पीछे बन्दर आगे बन्दर बोले पें पें...
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creativekona
झूमो नाचो गाओ
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[05 Aug 2009 09:58 AM]



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