पंछी बोला चार पहर "रामकांत दीक्षित"
रामकांत दीक्षित जी की एक रोचक लघुकथा धुंधली यादों को समेट कर लिख रहा हूँ जो मैंने स्कूल के दिनों में पढी़ थी । पुराने समय की बात है। एक राजा था। वह बड़ा समझदार था और हर नई बात को जानने को इच्छुक रहता था। उसके महल के आंगनमें एक बकौली का पेड़ था। रात क...
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उम्दा सोच
कथा
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[19 Sep 2007 11:06 AM]



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