किसान
फिल्म समीक्षा अच्छी नीयत से बनायी गयी ‘किसान‘ धीरेन्द्र अस्थाना अचानक ऐसा लगा जैसे हम सातवें-आठवें दशक के समय में बैठ कर ‘मेरा गांव मेरा देश‘ या ‘उपकार‘ जैसी कोई फिल्म देख रहे हैं। ‘कमीने‘, ‘देव डी‘, ‘न्यूयार्क‘ जैसी प्रयोगधर्मी और यथार्थवादी फिल्मों...
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dhirendra asthana
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[29 Aug 2009 06:54 AM]



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