ग़ज़ल
हर मुश्किल का हल हो जैसे आज नही तो कल हो जैसे आबाद हो गयी दिल की दिल्ली घर छोटासा, महल हो जैसे महकी महकी बाते उसकी पके आम के फल हो जैसे सूना सूना लगे भीड मे शहर नही जंगल हो जैसे यही ठहरती सुई घडी की तेरी याद का पल हो जैसे मेरे ऐब भी प्यारे तुझको तू म...
[पूरी पोस्ट]
डॉ.श्रीकृष्ण राऊत
ग़ज़ल
11
0
0
0
0
[17 Jan 2008 12:01 PM]



Shuffle








