किशोरदा की याद मे :कांच के गिलास

जरा सोचो यह कविता मेरे अजी़ज़ किशोर मोरे -जिन्हे हम किशोरदा कहते थे, उनकी डायरी से ली है।किशोरदा मेरे कॉलेज मे Maths पढाते थे।कविता,शायरी, सिनेमा,संगीत से उनका बडा़ लगाव था। राजकपूर,शंकर-जयकिशन, पु.ल.उनके weakpoints थे।किशोरदा अब इस दुनिया मे नही रहे। यह कवित... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.श्रीकृष्ण राऊत

कांच के गिलास

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[13 Mar 2008 11:44 AM]

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