ग़ज़ल

जरा सोचो ना अता,ना पता आदमी लापता गुम हुई कब नदी ऐ किनारे बता हाल क्या गाँव का क्या शहर जानता खो चले स्कूल मे बच्चे अपना पता कर ज़रा सामना दूर क्यों भागता... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.श्रीकृष्ण राऊत

ग़ज़ल

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[16 Mar 2008 02:25 AM]

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