यूँ ही नहीं ............( गीत )

अनुरक्ति कुछ ना कुछ लाचारी होगी ,प्यास प्राण पर भारी होगी ! यूँ ही नहीं किसी के आगे , उसने बांह पसारी होगी !! # नेह व्यथा से सृजन कथा तक , सब दस्तूर निराले देखे ! बच बच कर चलने वालों के , पांवों में ही छाले देखे ! जान बूझ कर जो स्वीकारी ,भूल बहुत ही प्यारी हो... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी

गीत ( चिंतन )

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[10 Jul 2008 11:04 AM]

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