अहंकार
अहंकार सब कुछ पाकर भी खुश नहीं होता और प्रेम सब कुछ देकर भी आनंदित होता है ! अहंकार और प्रेम दौनों अपनों पर ही चोट करते हैं जैसे नदी अपने विस्तार के लिए अपने ही किनारों को काट देती है जबकि नदी का अस्तित्व ही किनारों से है ! यदि किनारे न हों तो कोई भी...
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ललितमोहन त्रिवेदी
गीत ( दर्शन )
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[10 Jul 2008 11:03 AM]



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