व्यर्थ न कर देना तुम पल अभिसार का

अनुरक्ति प्रश्न छेड़ कर्तव्य और अधिकार का ! व्यर्थ न कर देना तुम पल अभिसार का !! # मन में कब तक व्यर्थ प्रतीक्षा लिए रहोगे जब कोई भी नहीं आएगा द्वार तुम्हारे ! तुम्हें पता है रात कटेगी तारे गिन गिन क्यों ख़राब करते हो फ़िर ये साँझ सकारे ! सहज आदमी होना कितना स... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी
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[13 Jul 2008 02:45 AM]

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