छू गई साँस इक पाँखुरी ........( गीत )

अनुरक्ति छू गई साँस इक पाँखुरी , प्राण मन गमगमाने लगे ! नैन में जबसे तुम आ बसे , स्वप्न भी झिलमिलाने लगे !! जब से काजल डिठौना हुआ , हो गया जो भी होना हुआ ! झम झमाझम हुई देहरी , छम छमाछम बिछौना हुआ बिन पखावज बिना पैंजनी , पाँव ख़ुद छन छनाने लगे !! नैन में जबसे... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी

गीत ( प्रेम )

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[07 Aug 2008 12:31 PM]

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