साहित्यिक लफ्फाजी ...........( व्यंग )

अनुरक्ति लेखन से भी एक बड़ा गुण है ' लफ्फाजी ' किसी तरह की बाजी न होते हुए भी इसके अंत में 'जी 'लगा हुआ है जो इसके सम्माननीय होने का प्रमाण है !जो शब्द ख़ुद ही सम्माननीय हो तो उसे धारण करने वाला तो परम सम्माननीय स्वतःही हो जाता है !जैसे 'महागप्प' को साहित्य म... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी

व्यंग

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[12 Aug 2008 13:31 PM]

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