आँख से अश्क भले ही न गिराया जाए .....( ग़ज़ल )
आँख से अश्क भले ही न गिराया जाये ! पर मेरे गम को हँसी में न उड़ाया जाये !! तू समंदर है मगर मैं तो नहीं हूँ दरिया ! किस तरह फ़िर तेरी देहलीज़ पै आया जाये !! दो कदम आप चलें तो मैं चलूँ चार कदम ! मिल तो सकते हैं अगर ऐसे निभाया जाये !! मुझे पसंद है खिलता ह...
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ललितमोहन त्रिवेदी
ग़ज़ल
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[04 Sep 2008 12:10 PM]



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