तूने भी ज्यादती बनाने वाले मुझसे की... ( गीत )
पावों में जंजीर, दौड़ की इच्छा मन भर दी ! तूने भी ज्यादती बनाने वाले , मुझसे की !! जीवन में सब थोड़ा थोड़ा ये संस्कार उमर भर ओढा रस की बूँदें तो छलकायीं लेकिन कसकर नहीं निचोडा मीरा की झांझर जैसा मन , व्यापारी सा जीवन ! ऊपर से ढाई आखर की भाषा मन भर दी !...
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ललितमोहन त्रिवेदी
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[29 Sep 2008 11:43 AM]



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