खूब पता था वो सागर है खारा पानी है ......( गीत )
थोड़ी फुर्सत हो तो ही पढियेगा ,आग्रह है मेरा !इस आपाधापी और प्रतिस्पर्धा के युग में" हम जीवन कैसे जीते हैं और कैसे जीना चाहिए "के बीच सेतु तलाशती एक रचना ! गीत खूब पता था वो सागर है खारा पानी है ! फिर भी प्यास बुझाने पहुंचे ये हैरानी है !! बहुत दूर तक...
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ललितमोहन त्रिवेदी
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[09 May 2009 13:50 PM]



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