अपनेराम पहुंचे चम्बल के बीहड़ में

सच को सलाम अपनेराम जब कंचे, गिल्ली-डंडा खेलत हते, तबही से बड़े-बुजुर्गन से सुनत रहे थे कि चम्बल के बीहड़ में बड़े-बड़े डकैत होत हैं। हमारी मम्मी ने तो न सुलाओ, लेकिन गांव जाते तब हमें बताओ जातो कि जल्दी सो जाओ नहीं तो बागी उठा लै जांगे। शोले फिल्म के ठीक उस डाय... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Pamar
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[02 Oct 2008 02:57 AM]

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