आलोक जी कर्ज अभी बाकी है..

सच को सलाम खरी-खरी कहने के लिए चम्बल की माटी के लाल आलोक तोमर को अपनेराम की राम-राम। दो बार आलोक जी को जानने-समझने का अवसर मुझे मिला। पहला ग्वालियर के बसंत विहार में रश्मि परिहार के निवास पर दोस्तों की महफिल में और फिर दिल्ली में आपके आवास पर। उनके बारे में औरो... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Pamar
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[15 Oct 2008 08:01 AM]

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