चरणभाट और कलमभाट

सच को सलाम ताल-तलैया की नगरी से ग्वालियर आना हुआ, तो सोचा क्यों न सियासी हलचल की नजर की जाए। जब अपनों (अरे भाई वोई कलमघसीटू क्लर्क) के बीच पहुंचे तो अहसास हुआ कि पूरा निजाम ही बदला हुआ है। जब भी सियासी बयार चलती है, लोगों के चोले बदल जाते हैं। कुछ नेता गिरगिट क... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Pamar
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[21 Nov 2008 06:25 AM]

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