अनिर्वचनीय सुख

बस, सिर्फ़ दो मिनट ... सुख की परिभाषा व सीमा मैं निर्धारित नहीं कर पाता । फिर भी कुछ ऎसे क्षण अनायास टकराते हैं कि मन एक अनाम आह्लाद से भर जाता है । हमारे हृदय को क्या पुलक से भर देता है, क्या नहीं ? इसको आप क्या शब्दों की सीमा में बाँध सकते हैं ?  जैसे कि पोपले [...]... [पूरी पोस्ट]
writer डा० अमर कुमार
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[19 May 2008 00:18 AM]

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