अभूतपूर्व का तो पता नहीं जी..पर यह है…

बस, सिर्फ़ दो मिनट ... अविस्मरणीय, कम से कम मेरे लिये तो है ही ! दूसरे भभकी देते हों..शेख़ी बघारते हों या कि कुछ और..लेकिन मैं यह नहीं कह सकता कि मैंने दुनिया देखी है, क्यॊकि मेरे लिये अब तक दुनिया के रंग गिन पाना ही कठिन है…सो ?  आज इस दुनिया का एक और रंग देखने को मिल... [पूरी पोस्ट]
writer डा० अमर कुमार
views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Jul 2008 14:46 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix