यौवन वाही सराहा जाता ...
यौवन वही सराहा जाता जो मदिरा के रंग ढले नयनो में हो मधुशाला, वांणी का मधु दिन रात छले अन्तर की अग्नि धधकती हो, हर अंग पुष्प की माला हो ज्यों मधु प्याले में ज्वाला हो, ज्वाला जो मधु का प्याला हो कोमल मदमाते अधरों पे सुख सात स्वर्ग अपवर्ग मिले यौवन वही...
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राकेश
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[07 Feb 2009 20:16 PM]



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