नन्हा आगंतुक
जन्म दे रहे इक सपने को आशाओं के ताने बाने हो गई पूरी एक प्रतीक्षा, खड़ी दूसरी सांसे थामे। जीवन की कोई बिन्दु कोख में, कुम्भकार की कच्ची माटी समय चक्र के पहिये पर ये, नए रूप में ढलती जाती। सपनों से सपनों का जुड़ना, आशाओं से आशाओं का जन्म हुआ माँ की ममत...
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राकेश
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[18 Mar 2009 10:45 AM]



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