एक शिकायत ज़िन्दगी से...

Kavi Sparsh ए ज़िन्दगी कहाँ ले जा रही है तू मुझको न तो रास्ते की पहचान और न ही मंजिल की कुछ ख़बर बस कदम दर कदम सुबह से शाम तक दौड़ा रही है मुझको मेरी हमदर्द है तू या फ़िर कोई अजनबी समझना हो रहा है मुश्किल क्यूँ इतना धुंधला आइना दिखा रही है मुझको कामयाबी की उम्मीद... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश
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[16 May 2009 13:11 PM]

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